शिवी एडं कंपनी का गेम प्लान देखें कैसे खेला जाली लाइसैंस का खेल

शिवी एडं कंपनी का गेम प्लान देखें कैसे खेला जाली लाइसैंस का खेल

जालन्धऱ (लखबीर)

वाह रे भ्रष्टाचार.. आरटीए दफ्तर के अधीन आते ड्राइविंग टैस्ट के करिंदे शिवी ए़डं कंपनी द्वारा किए गए हाईफाई जाली लाइसैंस स्कैंडल की परतें खुलनी शुरू हो गई हैं। इस स्कैंडल में सिर्फ वही 7 लोग जिम्मेवार नहीं हैं, जिनके खिलाफ पुलिस ने मामला दर्ज किया है। इसके अलावा ओर भी कई नाम इस स्कैंडल से जुड़ सकते हैं। इस जाली लाइसैंस के तार फगवाड़ा से भी सीधे तौर पर जु़ड़ते दिखाई दे रहे हैं। यह लाइसैंस लाइसैंस चाहे जालन्धर के आदमी के नाम पर जारी हुआ है तथा जालन्धर में इसकी रूपरेखा तैयार की गई हो पर फगवाड़ा में पार्टी जालन्धर की, लाइसैंस की जाली डायरैक्ट बैकलाग ऐंट्री फग़वाड़े से, प्रिंट शिवी के प्रिंटर से निकाला गया हो। इस तरह समझें पूरी कहानी… आवेदक जालन्धर का, लाइसैंस की जाली डायरैक्ट बैकलाग ऐंट्री फग़वाड़े से, प्रिंट शिवी के प्रिंटर से, साइन जालन्धर के अधिकारी के व मोहर फगवाड़े के अधिकारी की लगी हुई है। स्कैंडल की पूरी कहानी व इसके भ्रष्ट कारोबार के लिए क्या-क्या दांव पेच खेले गए तथा पूरी टीम का वेरवा हम आपने द्वारा पेश करने की कोशिश कर रहे हैं। इस हाईफाई स्कैंडल में चाहे अब तक 7 लोगों पर पर्चा दर्ज हो चुका है पर इस फिल्म के पर्दे के पीछे के कलाकार कौन-कौन है, वह भी सामने आ सकते हैं। पुलिस की तफतीश जारी है, जल्दी ही ओर नतीजे भी सामने आ सकते हैं।

स्कैंडल के मुख्य कलाकार

शिव कुमार शर्मा उर्फ शिवी, जतिन्द्र सिंह काका व रोहित कुमार तथा जालन्धर में रहने वाला म+कुल।
स्क्रिटप राइटर-जतिन्द्र सिंह काका
मार्किटिंग-रोहित कुमार
डायरैक्टर-म+कुल
प्रोडयूसर एडं फाइनल-शिवी
इस स्कैंडल की कहानी चाहे काका ने लिखी थी यानि कि (आवेदक को फंसाने का काम) पर इसे फाइनल टच शिवी (प्रिंट निकालने का काम) ने किया है। इसी तरह बाकी सारी किरदारों ने भी आपनी-आपनी भूमिका निभा कर विभाग के साथ-साथ एक एनआरआई को धोखे में रखकर धोखाधड़ी की है।

अब बात करते हैं कि यह सारे कौन हैं

शिवी एक प्राइवेट करिंदे के तौर पर काम करता आ रहा था, जिसका नाम करोड़ों को सरकारी फीस घोटाले में सामने आया था, जिसके बाद इसे दफ्तर से बाहर कर दिया गया। सैटिंग के जरिए समार्ट चिप कंपनी में आया तथा फिर से पुराने काम में जुट गया, जिस कारण आज उसके खिलाफ मामला दर्ज हो चुका है। शिवी शुरू से ही पैसों भरी जिन्दगी जीनी चाहता था, जिसके चलते उसने इस तरह का कदम उठाया। 8 हजार सैलरी में महंगे मोबाइल, महंगी मोटरसाइकल व महंगी दुकान खरीदने की चाह में वह जाली लाइसैंस बनाने लग पड़ा।
जतिन्द्र सिंह काका तहसील में एजैंटगिरी के साथ-साथ डीटीओ दफ्तर की एजैंटी करने लग पड़ा तथा धीरे-धीरे पैसों के लालच में उसने भी गलत काम शुरू कर दिए। कुछ साल पहले भी उसके खिलाफ इसी तरह का मामले में फंस चुका है। अब फिर से उसने वही राह पकड़ ली थी।
म+कुल, जोकि कभी डीटीओ दफ्तर में प्राइवेट करिंदे के तौर पर काम करता था। इसका नाम हैवी लाइसैंस घोटाले में उछला जिसे दफ्तर से बाहर का रास्ता दिखा गया। किसी तरह जुगाड़ लगाकर समार्ट चिप कंपनी में आया तथा फिर से घोटालों में शामिल हो गया। कैंची चप्पल पहन कर दफ्तर आने वाला म+कुल आज महंगी गाड़ियों के साथ-साथ दो बड़ी कोठियों का मालिक बन चुका है। अब विदेश भागने की तैयारी में लगा हुआ है। जबकि पहले उसके घर की छत्त से बारिश का पानी हमेशा टपकता था।

बाकी कलाकार भी आपनी-आपनी भूमिका निभाते रहे।  इस मामले में जल्दी ही एक संस्था द्वारा शिकायत सौंपने की तैयारी की गई है।