आरटीए के ट्रैक से घोटालों का समराट शिकंजे में, इस बार नहीं बचा पाई बेचारी ‘मां’

आरटीए के ट्रैक से घोटालों का समराट शिकंजे में, इस बार नहीं बचा पाई बेचारी ‘मां’

जालन्धर (लखबीर)

जालन्धर का आरटीए दफ्तर अधिकारी के काबू से बाहर होता जा रहा है, जहां एक ओर विटेंज नंबरों का खेल खेला जा रहा है, वहीं पूरा दफ्तर व आनलाइन ड्राइविंग टैस्ट ट्रैक एजैंटों का पूरी तरह से गुलाम बन चुका है। एजैंटों व समार्ट चिप कंपनी के मुलाजिमों की पक्की दोस्ती लगातार बड़े घोटालों को जन्म देती आ रही है पर आरटीए साहिब सिर्फ मूर्ति बनकर नजारा देखते प्रतीत हो रहे हैं। ताजा मामले अनुसार कुछ एजैंटों पर समार्ट चिप कंपनी के मुलाजिम शिवी ने बड़े घोटाले को जन्म देते हुए 25 हजार में जाली लाइसैंस बना दिया, जिसके आधार पर थाना 5 की पुलिस ने दो पर मामला दर्ज कर लिया है। फिल्हाल समार्ट चिप कंपनी के मुलाजिम शिवी को पुलिस ने रात 11 बजे उठा लिया जिसके बाद एक फिर से उसने आपनी मां की बिमारी का बहाना लगा पुलिस को चकमा देके बाहर आ गया। जिसके बाद पुलिस ने रात 1 बजे छोड़ दिया पर आज सुबह फिर से उसे काबू कर लिया है।

कैसे आए लपेटे में…

पुलिस ने सबसे पहले हमेशा ट्रैक पर मंडराने वाले एजैंट टोनी को दबोचा, जिसके बाद उसने आपने आप को वकील बताने वाले एजैंट काके का नाम लिया। काके ग्रिफ्त में आने के बाद विशाल एजैंट व विशाल ने समार्ट चिप के मुलाजिम शिवी का नाम लिया। इस चेन के जरिए पुलिस ने सब को उठा लिया है।

क्या था मामला…

जानकारी अनुसार उक्त एजैंटों ने एक जाली लाइसैंस बनाया था। लाइसैंस बनाने के लिए सबसे मुख्य भूमिका शिवी की रही। शिवी ने ट्रैक से खाली चिप लगा खाली लाइसैंस चोरी किया तथा उस पर बाहर से प्रिंट निकलवा कर पार्टी को सौंप दिया। पार्टी को जब इस संबंधी पता चला कि उक्त लाइसैंस जाली दिया गया है, तो मामला बाहर निकला जिसके बाद उक्त लोगों को दबोच लिया गया।

घोटालों से पुराना नाता है शिवी का

शिवी का नाम पहले भी कई बड़े घोटालों में जुड़ता रहा है। इससे पहले फीस घोटाले में भी इसने मुख्य भूमिका निभाई थी। जिसके बाद इसे बाहर निकाल दिया था पर फिर से समार्ट चिप कंपनी के अधिकारियों से सैटिंग करके सीट पर बैठ गया था। इससे पहले जब इसे शहर से दूर बदला गया तो इसने आपनी मां की बिमारी का बहाना लगाकर फिर से जालन्धर सीट संभाल ली थी तथा फिर से घोटाले करने लगा। लोगों की मानें तो ट्रैक इंचार्ज को सब कुछ पता होने के बावजूद उसने इसे न बदलने की सिफारश की तथा न ही इसे कंपनी से बाहर निकलने के लिए ही सिफारिश की थी, जिससे उनकी भूमिका भी संदेह में है।

मास्टरमाइंड शिवी के घर से सामान बरामद

शिवी के घर में पुलिस की छापेमारी दौरान बहुत सारे सामान पकड़ा गया है। पुलिस ने उसके घर से कम्पयूटर व अन्य सामान जब्त कर लिया है। इसी तरह विशाल के दफ्तर पर भी छापेमारी करके सामान को कब्जे में लिया गया है। फिल्हाल पुलिस उस प्रिंटर की तालाश में है, जिससे लाइसैंस के प्रिंट निकाले जा रहे थे। शिवी की सैलरी 8 हजार होने के बावजूद वह लग्जरी जिन्दगी जी रहा था। उसने हाल ही में नया बुलेट मोटरसाइकल खरीद था। इसके अलावा महंगे मोबाइल तथा लाखों की दुकान खरीद रखी है, जो इसका घोटालों से जुड़े होने की पूरी कहानी बयान करती है।
इस संबंधी सैक्ट्ररी आरटीए बरजिन्द्र सिंह से बात करनी चाही पर उन्होंने फिर से फोन नहीं उठाया। इतने बड़े मामले के बाद सैकट्ररी आरटीए आपने को फिर से मीडिया से दूर रखने की कोशिश में दिखाई दिए जिससे साबित होता है कि वह इस तरह के मुलाजिम को बचाने की कोशिश कर रहे हैं।