इस दफ्तर में जीरो का खेल खेल कर प्राइवेट करिंदे बने करोड़पति

इस दफ्तर में जीरो का खेल खेल कर प्राइवेट करिंदे बने करोड़पति

जालन्धर (लखबीर)

पूरी तरह प्राइवेट करिंदों के हाथों की कठपुतली बन चुके जिले के एक मलाईदार विभाग के अधिकारियों को सांप सूंघ चुका है तथा वह बेहोशी के आलम में पहुंच चुके हैं। अधिकारियों की आंखों पर सिर्फ पैसे की पट्टी बंधी हुई है तथा वह शरेआम सरकारी रिकार्ड को प्राइवेट करिंदों के हवाले सौंप कर सिर्फ पैसे इकट्ठे कर रहे हैं। अगर बीते समय की बात की जाए तो प्राइवेट करिंदे बहुत बड़े घोटालों को जन्म दे चुके हैं, जो अब तक फाइलों का श्रंगार बने हुए हैं। प्राइवेट करिंदे हरीश, कालू, मिन्टू, अनु, कामरेड रोजाना कारनामों को अंजाम दे रहे हैं पर इस ओर विजीलैंस, इंटीलैजैंस, सीआईडी ब्रांच देखने की जहमत नहीं उठा रहा। जल्दी ही प्राइवेट करिंदे हरीश, कालू, मिन्टू, अनु, कामरेड द्वारा किए गए घोटालों से पर्दा उठाया जाएगा। इससे पहले बात करते हैं प्राइवेट करिंदे भरत, डाक्टर व शिवी द्वारा किए घटोलों की…।

लाखों का घोटाला, कर्लक फंसी पर करिंदे नहीं…

अगर बीते समय की बात की जाए तो इस मलाईदार विभाग में लाखों का रसीद घोटाला सामने आ चुका है। इस रसीद घोटाले दौरान कैश काउंटर की रसीदें काटने दौरान प्राइवेट करिंदे डाक्टर व शिवी ने मोटी हेराफेरी को अंजाम दिया। घोटाले की परतें खुलने के बाद पता चला कि उक्त करिंदे रसीदें तो पूरी काटते थे पर पैसे जमा करवाने दौरान हेराफेरी करते आ रहे थे। इस दौरान सरकारी कर्लक मैडम कांता पर गाज गिरी, जिन्हें काबू कर लिया गया। उसके बाद अभी भी केस अदालत में चल रहा है। चाहे घोटाला सामने आने के बाद सरकारी कर्लक फंस गई हो पर प्राइवेट करिंदा शिवी व डाक्टर आज भी गुलर्शरे उड़ा रहे हैं। करिंदों के बचने का कारण उनका दफ्तर में कोई भी रिर्काड न होना था।

2 हजार जमा करवा बोलता था 20 हजार जमा करवाया…

इसी तरह मलाईदार विभाग में 2010-11 में एक नए घोटाले ने जन्म लिया। इस दौरान कर्लक के साथ मिलकर धोखाधड़ी की गई। बतादें कि इस दौरान प्राइवेट करिंदा भरत बैंक में सरकारी कैश की 20 हजार की फीस के बदले 2 हजार रुपए जमा करवाता रहा। भरत बैंक में 2 हजार जमा करवाकर रसीद पर आपने हाथ से 2000 के पीछे एक जीरो ओर लगाकर 20000 बनता रहा, जिसका पता चलने के बाद घोटाला सामने आ सका। पर यहां भी उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो सकी क्योंकि उसकी भी हाजरी तथा सैलरी दफ्तर से जारी नहीं होती थी यानि कि उसका भी कोई रिर्काड दफ्तर के पास मौजूद नहीं था।

आखिर विजीलैंस, सीआईडी व विभाग क्यों चुप्प…

बड़े-बड़े घोटाले सामने आने के बाद भी विजीलैंस, सीआईडी व विभाग ने आंखें मूंद रखी हैं। हैरानी की बात है कि इन घोटालों के समय भी मिन्टू, अनू, हरीश, कामरेड व कालू दफ्तर में मौजूद रहते थे। ऐसा नहीं है कि इन करिंदों ने कोई घोटाला नहीं किया है, इनकी करतूतें भी जल्दी लोगों के सामने होंगी।

मिन्टू की चालानों पर ड्यूटी होने के दौरान रसीद बुकें गायब हो चुकी हैं, उस मामले को भी जनता के सामने लाया जाएगा। अनू, कामरेड, कालू व हरीश किस-किस से छितर परेड करवा चुके हैं तथा इनके घोटालों की लिस्ट भी जनतक की जाएगी।