इस महकमे का रब्ब ही राखा…जहां अधिकारियों व मुलाजिमों की सांठ-गांठ बनती है जनता के ‘जी का जंजाल’… पढ़ें कौन सा है विभाग तथा कौन है ये मुलाजिम व अधिकारी

ट्रांसपोर्ट विभाग के मुलाजिम नहीं छोड़ पाते मलाईदार सीटें

एक वर्ष पहले बदली के बावजूद होशियारपुर का कर्लक नहीं छोड़ रहा चार्ज

जालन्धर में लम्बे समय से खाली है एआरटीओ की दो कुर्सियां

जांच के बाद होगी कार्रवाई : एसटीसी


जालन्धर (लखबीर, विशाल)

ट्रांसपोर्ट विभाग का रब्ब ही राखा है। हालात यह बन चुके हैं कि जहां एक ओर मुलाजिम या कर्लक एसटीसी जैसे अधिकारी को शरेआम ठेंगा दिखाते प्रतीत हो रहे हैं, वहीं एआरटीओ की एक वर्ष खाली कुर्सी लोगों को चिढ़ा रही है। बतादें कि पिछले एक वर्ष पहले होशियारपुर के एक कर्लक को जालन्धर के बदला गया था पर इतना समय बीतने के बाद भी उसने पुरानी कुर्सी नहीं छोड़ी तथा अभी भी बिना किसी रोक टोक के होशियारपुर में ही तैनात है। जिससे साबित होता है कि विभाग कितना कमाऊ है, जिसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि कोई कलर्क बदली के एक साल बाद भी चार्ज छोड़ने के लिए तैयार नहीं है। जी हां, इस तरह का मामला आरटीए दफ्तर होशियारपुर का सामने आ रहा है, यहां का कलर्क एस.टी.सी. जैसे अधिकारी को भी कुछ नहीं समझ रहा। बतादें कि पूर्व एस.टी.सी. ने उक्त कलर्क के चार्ज न छोड़ने पर कारण बताओ नोटिस जारी किया था। लोगों अनुसार होशियारपुर के आरटीए की मेहरबानी के कारण उक्त कलर्क को नई जगह नहीं भेजा जा रहा। इस कलर्क की बदली 31 जुलाई 2019 को होशियारपुर से जालन्धर हो चुकी है पर बावजूद इसके वह पुराना शहर छोड़ने के लिए तैयार नहीं है।

एक वर्ष से जालन्धर में एआरटीओ की कुर्सी भी सुनसान…

बतादें कि जालन्धर में पिछले एक साल से एआरटीओ की कुर्सी भी खाली चली आ रही है, जिस कारण लोगों को खूब परेशान होना पड़ रहा है। बतादें कि इससे पहले जालन्धर में दो एआरटीओ व एक आरटीए तैनात थे पर लम्बे समय से दो एआरटीओ की कुर्सियां खाली चली आ रही हैं, जिस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा। इससे पहले एक एआरटीओ ट्रैक तथा दूसरा आरटीए दफ्तर में बैठ लोगों के काम निपटाता था पर अभी दोनों कुर्सियां खाली लोगों को चिढ़ा रही हैं। दोनों अधिकारियों की उपस्थिती न होने कारण डाक साइन के काम के साथ-साथ चालानों का काम भी प्रभावित हो रहा है। चालानों के काम से जहां विभाग को करोड़ों का राजस्व आता था पर उसमें काफी गिरावट आ गई है।

आरटीए के छुट्टी पर जाने के बाद रुक जाता है काम…

आरटीए के छुट्टी पर जाने कारण लोगों के लिए ओर मुसीबत बन जाती है। पिछली आरटीए जब छुट्टी पर गईं थी तो उस समय एआरटीओ की कुर्सी खाली होने कारण लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा था पर बावजूद इसके विभाग ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया।

जांच के बाद होगी कार्रवाई : एसटीसी

इस संबंधी स्टेट ट्रांसपोर्ट कमिश्नर (एसटीसी) अमरपाल सिंह ने कहा कि जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी। अगर बदली के बाद भी कोई मुलाजिम शहर नहीं छोड़ता तो वह सीनियर अधिकारियों का उलंघ्घन कर रहा है, जिसके खिलाफ कार्रवाई होनी जरूरी है। तथा जो सीटें खाली हैं, उन्हें जल्दी भर दिया जाएगा ताकि जनता को परेशानी का सामना न करना पड़ सके।