दोस्त, दोस्त न रहा…9 महीने पहलां जिसदे पैर चुकवाए सी, उसने ही चुकवात्तीयां लत्तां

जालन्धर (लखबीर) वाह बई कुर्सी... कुर्सी दा लालच किसे सियासी बंदे च नहीं बल्कि सरकारी मुलाजमां च बोत हुंदा है क्योंकि बोत सारे अजेहे विभाग हुंदे हन जित्थे कुर्सी दा…

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